मैं एक आम भारतीय हूं. आतंकवाद से नफरत है क्योंकि यह सभ्य समाज के माथे पर लगा कलंक है. बेगुनाहों की जान लेने से जघन्य अपराध और कोई नहीं. यदि दुनिया में हिंसा से किसी मसले का हल निकलना संभव होता तो दुनिया कभी की खत्म हो गई होती… प्रेम और सद्भाव मानव की सहज प्रवृत्ति है इसलिए हिंसा को त्याग दें. आतंकवाद का मुकाबला करें और आतंक को नकार दें.
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