Posted by: bharatiyam on: सितम्बर 18, 2008
आतंकवाद का विरोध करना हर उस जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है जो अहिंसा, प्रेम और भाईचारे में विश्वास रखता है. जो लोग हिंसा और दहशत के रास्ते पर चल रहे हैं, उन्हें दंड देना सरकार का काम है और हमें सरकार को इस काम में मदद करनी चाहिए. ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार और उपेक्षा करनी होगी जो राष्ट्र और समाज को हिंसा से नुकसान पहुंचा रहे हैं.
लोकतंत्र में सबको अपनी बात संविधान के दायरे में रहकर कहने का अधिकार है लेकिन जो इसका अतिक्रमण करता है और इस अधिकार का नाजायज लाभ लेना चाहता है, वह संविधान का अपमान करता है. ऐसे राष्ट्रदोहियों को देश और कानून व्यवस्था दंडित करेगी. हम अमनपसंद शहरियों को ऐसे लोगों के खिलाफ अपने विरोध का स्वर बुलंद करना होगा ताकि वे हतोत्साहित हों और उन्हें अपने गलत होने का एहसास हो सके.
माना कि उनके पास बम हैं, तो हमारे पास साहस, वे आतंक की बात करते हैं तो हम अमन की, वे हिंसा का रास्ता अपनाते हैं और हम अहिंसा के पथ पर अडिग रहेंगे, वे नफरत का बीज बो रहे हैं और हम प्रेम व भाई-चारे के मार्ग पर चलते रहेंगे. प्रण करें कि उनकी मार-काट का हम एक ही तरीके से जवाब देंगे और वह है जियो और जीने दो का सिद्धांत… आतंकवाद का विरोध करें, लेकिन विरोध के नाम पर किसी को आतंकित नहीं करें.
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