Posted by: bharatiyam on: सितम्बर 15, 2008
क्या आतंकवाद को देख कर आपका रक्त नहीं उबलता? क्या हम इतने कायर हैं कि चुपचाप हिंसा को सहते रहें? कब तक निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे? आतंकवाद के खिलाफ कोई सामूहिक विरोध का स्वर क्यों नहीं उठता? मैं किसी से बंदूक लेकर लड़ने का आह्वान मैं नहीं कर रहा क्योंकि मैं जानता हूं कि हिंसा को हिंसा से खत्म नहीं किया जा सकता, यह हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन कम से कम विरोध का स्वर तो मुंह से निकाल ही सकता हूं…
आए दिन हो रही आतंकवादी घटनाओं के खिलाफ विरोध का स्वर इस मंच पर उठाएं. सरकार के बहरे कानों तक आवाज पहुंचाने के लिए हमें एकजुट होना पड़ेगा. हमें बताना होगा कि हम शांतिप्रिय हैं और अपने देश में अपने घर में सुरक्षित जीवन जीना हमारा मौलिक अधिकार है.
हिंसा इस अधिकार का हनन है और सरकार का यह उत्तरदायित्व है कि वह इसे रोके. एक नागरिक के रूप में हमारा अधिकार है कि हम शांति से जियें और कर्तव्य है कि हिंसा का विराध करें. यह चिट्ठा इसी विरोध का स्वर है… हिंसा के खिलाफ एक आम भारतीय का शांतिप्रिय विरोध…. यदि आप भी हिंसा के विरोधी हैं तो इस विरोध को अपना समर्थन दें और इस आवाज को बुलंद करें ….
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