आतंकवाद के विरुद्ध

Archive for सितम्बर 2008

हिंसा की कोई जात-पात नहीं …

Posted by: bharatiyam on: सितम्बर 21, 2008

दिल्‍ली के दंगों की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि इस्‍लामाबाद में भी धमाका हो गया. 60 निर्दोष लोगों ने जान गंवा दी. अब इसे क्‍या कहेंगे.. जिन पर आतंकवाद फैलाने का दोष है, वे भी आतंकवाद के शिकार हो रहे हैं. यह राक्षस अब भस्‍मासुर साबित हो रहा है और उन्‍हें यह [...]

फिर भी तमाम दंगे फसाद और हिंसा धर्म के नाम पर ही की जा रही है. भारत में आए दिन आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकवादी इसे जिहाद का नाम देते हैं. धर्म को यूं बदनाम करने का क्‍या कारण है … किस धर्म ने कहा है कि इंसान और इंसान के बीच फर्क [...]

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आतंकवाद का एक ही जवाब है…

Posted by: bharatiyam on: सितम्बर 18, 2008

आतंकवाद के विरुद्ध आतंकवाद का विरोध करना हर उस जिम्‍मेदार नागरिक का कर्तव्‍य है जो अहिंसा, प्रेम और भाईचारे में विश्‍वास रखता है. जो लोग हिंसा और दहशत के रास्‍ते पर चल रहे हैं, उन्‍हें दंड देना सरकार का काम है और हमें सरकार को इस काम में मदद करनी चाहिए. ऐसे लोगों का सामाजिक [...]

पीर पर्वत सी हुई …

Posted by: bharatiyam on: सितम्बर 15, 2008

आतंकवाद के विरुद्ध क्‍या आतंकवाद को देख कर आपका रक्त नहीं उबलता? क्‍या हम इतने कायर हैं कि चुपचाप हिंसा को सहते रहें? कब तक निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे?  आतंकवाद के खिलाफ कोई सामूहिक विरोध का स्‍वर क्‍यों नहीं उठता? मैं किसी से बंदूक लेकर लड़ने का आह्वान मैं नहीं कर रहा क्‍योंकि [...]


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